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Monday, 11 February 2013

प्रतीक्षा


Sudheer Maurya
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मैंने हाथ रख के देखा तो सुभाष का माथा हल्का सा गर्म लग रहा था, में चाय बना कर लाया तो बहुत कहने पर उसने आधा कप चाय पी. फिर लेट गया. उसकी आँखे खुली हुई थी.
रात के ९ बज रहे थे-
अमूमन सुभाष इस समय सो जाया करता है, पर पता नहीं वो क्यों सोने की कोशिश नहीं कर रहा था.
सुभाष मेरे चाचा का लड़का है. जिसे मेरे चाचा ने क्लास ६ में अड्मिसन के लिए मेरे पास कानपूर भेज दिया था, जहाँ में बी.एस.सी. की पदाई कर रहा था. सितम्बर का महिना ख़त्म हो रहा था, मतलब स्कुल चालू हो के अमूमन २,३ महीने हो रहे थे.
वो बिस्तर पर लेटते ही सो जाता है.पर आज सो नहीं रहा है. रात के ११ बज रहे है. में पदाई ख़त्म करके सोने के इरादे से उठा.
देखा तो आँखे खुली हैं,
पूछा-नींद नहीं आ रही.
इनकार में सर हिलाया-
शरीर में दर्द है-
वापस वही प्रतिक्रिया-
मस्तक और बदन छु कर देखा, नार्मल थे.
आयु  उसकी होगी ९ या १० साल.
में भी लेट गया, सोच सुबह डाक्टर को दिखा दूंगा.
३ बज रहा होगा प्यास की वजह से मेरी आँख खुल गई, पानी पिटे ही नज़र गई-  देखा तो आँख खुली थी. पानी दिया-
२ घूंट पी लिए-
वापस लेट गया. नींद ने धर दबोचा. नंबर १ के लिए रोज़ ही ५ बजे उठता था. टायलेट से वापस आया तो उसे जागते पाया.
पूछने के जवाब में, वो चुप रहा.

स्कुल जाने के लिए तयार हो गया था, मैंने अपने को टोस्ट और चाय और उसे टोस्ट के साथ दूध दिया.
वो टाई ठीक करवाने के लिए मेरे पास आया, पूछा-स्कुल जावगे ठीक हो न- उसने हाँ में सर हिलाया.
दूध का घूंट लेते हुए बोला- भय्या घर से चावल आये थे मैंने धोके से १ मुट्ठी खा लिए.
मैंने पूछा धोके से क्या मतलब-मुझे लगा भुने होंगे.
तो की हुआ मैंने बोला-
नहीं उस दिन गावं में मम्मी संगीता दीदी से बोल रही न-
क्या बोल रही थी-
यही की कच्चे चावल खाव्गी तो लड़की होगी-
मैंने झटके से सर उठाकर उसका चेहरा देखा था.

सुधीर मौर्या 'सुधीर'